शुद्ध प्रेम


कहानी की शुरुआत सुधीर नाम के एक 15 साल के बच्चे से होती है। सुधीर एक गरीब परिवार का बच्चा था। सुधीर का लालन पालन उसके मां पिताजी ने बहुत ही अच्छे तरीके करने का प्रयास किया । पिता के पास अच्छी परवरिश करने के लिए आर्थिक मजबूती तो नही थी फिर भी उन्होंने अपने खेतों के सहारे ही बच्चों को समाज में चलने योग्य संस्कार दिए। सुधीर जैसे ही अपने किशोरावस्था में प्रवेश करता है सभी युवाओं के भांति उसके भी मन में प्रेम की हिलोरें लेने लगी और उसके भी मन मंदिर में एक साथी की क्षवि आन बैठी। बात उस समय की है जब सुधीर अपना शैक्षिक जीवन को खत्म कर के माता, परिवार व अपने लिए दो वक्त की रोटी के तलाश में घूमने लगा। क्योंकि उसके पिता की कुछ वर्ष पहले देहांत हो गई थी। सुधीर को कुछ दिनों बाद एक छोटी सी कंपनी में नौकरी मिल गई। नौकरी मिलते ही उसके जीवन में ख़ुसी की लहर आ गई। एक दिन सुधीर अपने दफ्तर में काम करने गया वंहा उसकी नजर एक सहायक कर्मी सुंदर लड़की को देखा और देखता ही रहा और उसी दिन से मन ही मन अनंत प्रेम करने लगा। सुधीर उस लड़की के पास गया और नाम और घर पूछा, लड़की शरमाते हुए अपना नाम “कोमल” बताई और उस शहर के ही सम्पन्न घराने के लिए अपना परिचय बताती है। धीरे धीरे दोनो एक अच्छे मित्र हो जाते हैं एक दूसरे के प्रति सच्ची मित्रता निभाते हैं। पर सुधीर अपने मन की बातों को कभी कोमल के समक्ष नही रख सका क्योंकि उसे इस बात की हमेसा भय सताती रहती थी कि अपने प्रेम के इजहार करने के उपरांत कोमल को बुरा ना लगे और इस वजह से दोनो की पवित्र मित्रता भी कलंकित ना हो जाये। सुधीर को कोमल की आवाज का दीवाना हो गया था। पर सुधीर का प्रेम इतना पवित्र था कि वह केवल मन ही मन प्रेम करता। कुछ दिनों के बाद कोमल का कहनाभी सुधीर के प्रति प्रेम बढ़ने लगा। पर कोमल सुधीर की तरह प्रेम नही की उसने अपने प्यार का इजहार सुधीर से किया पर सुधीर यह कहते हुए थोड़ी भी नही सोचा कि वह कोमल के लायक नही है। उसने कोमल को साफ शब्दों में कह दिया कि उसकी कमाई इतनी नही है कि वह कोमल को सुख सुविधा दे सकेगा। पर कोमल यह कभी मानने को तैयार ही नही थी वह अपना जीवन व्यतीत करना चाहती थी तो केवल सुधीर के ही साथ। एक वक्त ऐसा आया जब कोमल अपना सब कुछ सुधीर पर निवछावर करने को आ गई। पर सुधीर यह कहकर कोमल को इसके घर भेज दिया कि वह उसके मन से प्रेम करता है न कि तन से। उस दिन के बाद कोमल की नजरों में सुधीर के प्रति प्रेम और अधिक बढ़ गया। धीरे धीरे समय बीतता गया और कोमल का विवाह एक व्यवसाई परिवार में हो गई और वह अपने प्रेम को दिल में ही छुपाए अपने ससुराल चली गई। ईधर सुधीर भी अंदर ही अंदर घुट घुट कर कोमल के यादों में रहने लगा। और कुछ ही वर्षों बाद सुधीर की भी शादी हो गई। वह आज अपने छोटी सी परिवार में खुस तो है। पर कंही न कंही कोमल की कमी उसके जिन्दजी में खटकती है, वह सबके साथ खुस रहते हुए भी खुस नही है।

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