Ketar News । Garhwa । छठ महापर्व को लेकर नारायण वन की तयारी हुई पूरी

केतार से इम्तेयाज आलम की रिपोर्

केतार । गढ़वा । केतार लोक आस्था के महापर्व छठ के लिए प्रसिद्ध भगवान भाष्कर नगरी नारायण वन में छठ महापर्व की तैयारी पूरी कर ली गई है।भगवान भाष्कर नगरी नारायण वन को दुल्हन की तरह सजाया गया है।छठ व्रतधारी श्रद्धालुओं का आगमन नारायण वन में गुरुवार सुबह से ही शुरू होने लगा है।प्रेसवार्ता में मंदिर निर्माण कमिटी के अध्यक्ष उमाशंकर चौबे ने बताया कि भाष्कर नगरी नारायण वन में हजारो श्रद्धालुओं का प्रत्येक वर्ष आगमन होता है।यहां झारखण्ड समेत सीमावर्ती प्रदेश बिहार,छतीसगढ़, मध्यप्रदेश के काफी श्रद्धालु आते है।श्री चौबे ने बताया कि जो भी श्रद्धालु सच्चे मन से कामना लेकर यहां आते है उनका कामना अवश्य ही पूर्ण होती है।उन्होंने बताया कि यहां प्रत्येक वर्ष पुत्र रत्न की अभिलाषा लेकर आई माताए बहने को पुत्र रत्न की प्राप्ति होती है।प्रत्येक वर्ष मंदिर परिसर में माताए बहने की गोद भरती है। मंदिर निर्माण कमिटी के संरक्षक योगेंद्र सिंह ने बताया कि लोक आस्था का छठ पर्व मुकुन्दपुर स्थित नरायण वन में आठ दशकों से छठ पूजा का आयोजन होती है।इस बार कोविड 19 को देखते हुए खास ध्यान रखा गया है। संरक्षक अजय वर्मा ने बताया कि सरकार के द्वारा जारी गाइडलाइन के अनुसार अक्षस पालन किया जाएगा।कोविड19 की बढ़ते रफ्तार को देखते हुए सेनेटाइजर,मास्क का उचित व्यवस्था की जाएगी।साथ ही मंदिर परिसर में सुरक्षा,स्वास्थ्य,शुद्ध पेयजल,लाइट,पार्किंग का भी प्रशासन एवं कमिटी के द्वारा कर ली गई है।

> सुप्रसिद्ध नारायण वन की उत्पत्ति

भाष्कर नगरी स्थित सूर्यमंदिर नारायण वन मुकुंदपुर में पिछले आठ दशक से छठ महापर्व मनाया जा रहा है।मंदिर निर्माण कमिटी के संरक्षक रामप्रवेश वर्मा ने बताया कि श्री श्री कृष्णा नंद ब्रह्मचारी मुकुंदपुर के पड़ोसी गांव में यज्ञ कराने आए थे।तभी उनको सपना आया कि मुकुंदपुर के दक्षिण में भगवान सूर्य की प्रतिमा मिट्टी में भूत गढ़वा नामक जगह पर दबे हुए है।श्री ब्रह्मचारी ने गांव वालों को लेकर भूत गढवा नामक जगह पर आकर मिट्टी खोदवाए।तब भगवान सूर्य की प्रतिमा मिली तभी से इस भूत गढवा नामक स्थान को बदल कर नारायण वन से प्रसिद्ध हुआ।

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