मझिआंव । गढ़वा । नवरात्रि के प्रथम दिन माता शैलपुत्री का पूजा-अर्चना आरम्भ

मझिआंव से सूरज प्रकाश की रिपोर्ट

मझिआंव । गढ़वा । नगर पंचायत क्षेत्र अंतर्गत वार्ड नं 05 अखौरीतहले तथा वार्ड नं 04 गहिडी में माँ दुर्गा नवरात्रि के प्रथम दिन कलश स्थापना व पूजा अर्चना आरम्भ हुआ। कवायत यह है कि कोविड-19 वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए झारखंड सरकार के सख्त नियमों को मध्य नजर रखते हुए मां दुर्गा के नवरात्र के पहले दिन माता शैलपुत्री की पूजा अर्चना आरंभ हुआ।

गौरतलब है कि मां दुर्गा का पहला स्वरूप शैलपुत्री का है। पर्वतराज हिमालय के यहां पुत्री के रूप में उत्पन्न होने के कारण इनको शैलपुत्री कहा गया। यह वृषभ है। पर आरूढ़ दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में पुष्प कमल धारण किए हुए हैं। यह नवदुर्गा के प्रथम दुर्गा हैं। नवरात्रि पूजन में पहले दिन इन्हीं का पूजन होता है। प्रथम दिन की पूजा में योगीजन अपने मन को मूलाधार चक्र में स्थित करते हैं। यहां से उनकी योग साधना शुरू होती है।

बताते चलें कि हिंदू धर्म के पीछे रोचक ऐतिहासिक कहानियां छिपी हुई है। कहा जाता है, कि दुर्गा पूजा का पर्व हिंदू देवी दुर्गा की बुराई के प्रतीक राक्षस महिसासुर पर विजय के रूप में मनाया जाता है। अतः दुर्गा पूजा का पर्व बुराई पर भलाई का विजय के रूप में भी मनाया जाता है। यह न केवल सबसे बड़ा हिंदू उत्सव है बल्कि यह बंगाली हिंदू समाज में सामाजिक सांस्कृतिक रूप में सबसे महत्वपूर्ण उत्सव भी है।

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