खरौंधी । गढ़वा । कुदरत का कहर बारिश नहीं होने से काटना पड़ा धान का बिजड़ा

खरौंधी से योगेन्द्र प्रजापति की रिपोर्ट

खरौंधी । गढ़वा । खरौंधी प्रखंड में इस वर्ष बारिश नहीं होने के कारण किसानों के चेहरा पर मायूसी छाई हुई है। क्योंकि प्रखंड के लगभग 50 प्रतिशत से भी ज्यादा किसान अपनी धान की खेती नहीं कर पाया है. किसान अपनी धान के बिजड़ो को खेतों से काटकर मवेशियों को खिला रहे हैं .जबकि हजारों रुपए के हाइब्रिड धान के बीजड़ा , रिसर्च धान के बीज, एवं संशोधित धान के बीज किसानों ने लगाए थे। धान की खेती प्रखंड के किसानों के लिए प्रमुख फसल है क्योंकि इसी फसल से खरौंधी प्रखंड के किसान अपने घर के बाल बच्चों का भरण पोषण करते हैं. धान को किसान बेचकर अपने घर की आर्थिक स्थिति को मजबूत करते हैं. इस बार किसानों को चौतरफा मार झेलनी पड़ी है. इस वर्ष कोरोना जैसी महामारी के कारण लॉकडाउन लगा था. जिसमें प्रखंड के गरीब परिवार से जो लोग बाहर जाकर कमा रहे थे वह भी अपने घर पर आकर कर खेती करना पसंद किया था . उन लोगों के द्वारा इस वर्ष के बुआई के समय शुरुआत में बारिश अच्छा होने के कारण महंगा महंगा बीज लेकर धान की बिजड़ा बोया गया। परंतु उन्हें क्या मालूम था कि इस वर्ष खेती से भी हाथ धोना पड़ेगा। इसके अलावा किसानों को मक्का तिल , रहर आदि के फसलों में भी बारिश नहीं होने से नुकसान पहुंचा है. जिससे किसान काफी मायूस हैं . इसके अलावा आधे किसान किसी प्रकार सिंचाई की व्यवस्था कर धान का फसल की रोपाई की थी लेकिन बारिश नहीं होने के कारण उनका भी फसल मरने की स्थिति में खड़ा है

इधर किसानों में रामनाथ बैठा लक्ष्मी नारायण प्रजापति, राम प्रसाद मेहता, रामखेलावन पासवान ,मोतीचंद बैठा आदि ने बताया कि हम किसान अब क्या करें पता नहीं चल रहा है. क्योंकि हमारे परिवार के कुछ सदस्य बाहर जाकर भी पैसा कमा लेते थे. परंतु अभी घर पर बैठे हैं दूसरी तरफ हम लोग धान के बिजड़ा को काटकर मवेशियों को खिलाने के लिए मजबूर हैं .इधर धान का पुआल नहीं होने से भी मवेशियों के सामने चारा की समस्या उत्पन्न होगी .उन्होंने कहा कि हम लोगों को अगर जिला प्रशासन के द्वारा किसी प्रकार की सुविधा नहीं दिया गया तो हम लोगों के सामने भूखमरी जैसे हालात बन जाएगा ।

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