बंशीधर नगर(गढ़वा): चित्तविश्राम गांव में स्थित शिवमंदिर के प्रांगण में आयोजित श्रीमदभागवत कथा ज्ञान यज्ञ महोत्सव के पांचवें दिन प्रवचन कर रहे


बंशीधर नगर(गढ़वा): स्वयं को भी प्रभु को सौंप देना ही सच्ची शरणागति है। उक्त बातें शनिवार को चित्तविश्राम गांव में स्थित शिवमंदिर के प्रांगण में आयोजित श्रीमदभागवत कथा ज्ञान यज्ञ महोत्सव के पांचवें दिन प्रवचन कर रहे
श्री श्री 1008 जगदगुरू रामानुजाचार्य स्वामी श्रीधराचार्य जी महाराज ने कहा। उन्होनें कहा कि भगवान भाव के भूखे होते हैं। उन्होंने कहा कि पैसा कमाने का सही अर्थ है उसे सत्संग और भक्ति में खर्च करना। श्रीधराचार्य जी महाराज ने हिरणकशयप अपने पुत्र प्रह्लाद को मारना चाह परंतु प्रहलाद को मार न सके क्योंकि जाको राखे साइयां मार सके न कोय। भगवान विष्णु ने भक्त प्रहलाद के आस्था और विश्वास को बनाये रखने के लिए खंभे से भी प्रगट हो गये। जो भक्त के प्रति आस्था भगवान ने दिखाया किसी उन्होंने श्रद्धालुआें से मन लगाकर कथा का रसपान करने की अपील की। मौके पर श्रीकांत तिवारी, कन्हैया चौबे, वीरेंद्र पांडेय, श्रीकांत मिश्रा, तेजप्रताप पांडेय, अमरनाथ पांडेय, प्रो कमलेश पांडेय, सुशील पांडेय, चंदन पांडेय, बंगाली सिंह समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा का रसपान किया।

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