गढ़वा : बी आर पी / सी आर पी महासंघ की बैठक सम्पन्न

बैठक करते बीआरपी / सीआरपी महासंघ के पदाधिकारी

जानकारी देते महासंघ के अध्यक्ष अरविंद चौबे

गढ़वा : जिला बी आर पी / सी आर पी महासंघ की बैठक  को संघ के जिलाध्यक्ष अरविंद चौबे की अध्यक्षता में गढ़वा बी आर सी में सम्पन्न हुई। इस मौक़े पर अध्यक्ष अरविंद चौबे ने कहा कि बीआरपी सीआरपी महासंघ की बैठक वस्तुतः बदलते परिवेश के कारण पिछले 30 जनवरी को बीआरपी सीआरपी महासंघ के तत्वाधान में लगभग 2000 बीआरपी सीआरपी ने विधानसभा का घेराव किया था और सरकार ने बर्बरतापूर्ण  लाठियां चलाई थी । उस समय बहुत से साथियों की चोटें भी आई थी, जिनमें से एक मैं भी था। श्री चौबे ने बताया कि  उस समय प्राथमिक शिक्षा निदेशक के साथ बीआरपी सीआरपी महासंघ के प्रतिनिधियों के बीच में एक समझौता हुआ था कि 15 दिनों के अंदर सरकार कमेटी बना देगी। उन्होंने बताया कि बीआरपी सीआरपी की जो मूल समस्याएं हैं जो आज कहिए कि बीआरपी सीआरपी एक अभिवंचित वर्ग में आते हैं और बीआरपी सीआरपी की योग्यता एमएससी और बीएससी  जिसकी बहाली सन 2005 में हुई थी ।आज भी न्यूनतम मानदेय पर बीआरपी सीआरपी को आज के परिवेश में CRP को 11 9 79 रुपए और  बीआरपी को 12645 रुपए मानदेय देह  है ।जो कि भारत सरकार  की कल्पना है, कि न्यूनतम मानदेय 24000 होनी चाहिए। उससे काफी दुखित है। उन्होंने कहा कि इसी मांग को लेकर बीआरपी सीआरपी महासंघ समान काम समान वेतन और बीआरपी सीआरपी आए दिन जो तनाव में मृत्यु हो रही है और तनाव से 1 साल में करीब बीआरपी सीआरपी के करीब 8 लोगों की दिल का दौरा पड़ने से मृत्यु हो गई और लगभग 25 से 30 लोग बीमारी अवस्था में चले गए। इन्हीं सब कारणों के कारण बीआरपी सीआरपी के द्वारा महाआंदोलन किया गया था और सरकार से मांग किया गया था ,लेकिन सरकार ने अभी तक इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाई है। उसी के बदलते हुए परिवेश में पुनः बैठक की गई है और 30 जनवरी को सरकार के साथ जब वार्ता हुई तो आज 11 फरवरी होने चला है। समय सीमा पूरा होने जा रहा है ।अभी तक सरकार का कोई ठोस जवाब नहीं आया है। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि बीआरपी सीआरपी के द्वारा महा आंदोलन किया जाएगा। चाहे वह आर-पार की लड़ाई हो, मानवाधिकार का हनन कर रही है, उसके विरुद्ध बिगुल फुकने का काम करेगी। क्योंकि हमें न्याय चाहिए ,चाहे वह न्याय हमें झारखंड सरकार दे या भारत सरकार दे और जब तक बीआरपी सीआरपी को न्याय नहीं मिल जाता है, समान काम समान वेतन नहीं मिल जाता है और जब तक हमारे लोग मृत्यु काल के जो दस्त होते जा रहे हैं, उन्हें एक कफ़न का कपड़ा भी नसीब नहीं हो रहा है ।उनको जब तक मुआवजा नहीं मिल जाता तब तक महासंघ लड़ता रहेगा। महासंघ का उद्देश्य संघ के एक-एक लोगों को सुरक्षा प्रदान करना। अंतिम समय 15 फरवरी तक का इंतजार में है  उसके बाद बीआरपी सीआरपी महासंघ अपने अगले आंदोलन की तैयारी में जुट जाएगी और अपनी लड़ाई जारी  रखेगा. उन्होंने अंततः कहा कि  राज्य सरकार ने अपने पूर्व के वादों और समझौते को नजरअंदाज कर सी आर पी / बी आर पी को छलने का कार्य किया है। सरकार आज तक हुए किसी भी समझौते पर अमल नहीं किया है। जो महासंघ के पदाधिकारी कतई बर्दाश्त नही करेगी।  बैठक में उपाध्यक्ष अशोक विश्वकर्मा, गुलाम सरवर, ओम दुबे,दुर्गेश मिश्रा, सद्दाम हुसैन, रज़िया खातून, सत्येन्द्र चौबे, अनूप शुक्ला, दिलीप यादव, संतोष पाठक ,अजीत तिवारी पाण्डेय ओमप्रकाश शर्मा,मनोहर चौबे के साथ साथ अन्य सदस्य उपस्थित थे।

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